बजट में आयकर स्लैब बदला तो खपत आधारित शेयरों में तेजी संभव

बजट के समय बाजार में काफी उतार-चढ़ाव दिखाई देता है। पोर्टफोलियो सुरक्षित बनाने और जोखिम से बचाव के लिए डेरिवेटिव सेगमेंट में गतिविधियां बढ़ जाती हैं। इस बार आम चुनाव का साल है। ऐसे में एनडीए सरकार 1 फरवरी को पेश होने वाले अंतरिम बजट में आम लोगों को कई फायदे दे सकती है। माहौल भी इसके अनुकूल है। इस समय महंगाई दर कम है। जीडीपी विकास दर 7% से अधिक है। प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह अधिक है। इन सब के ऊपर राजकोषीय घाटा भी लक्ष्य के आसपास है। इन सबको देखते हुए सरकार के सामने लोक-लुभावन बजट पेश करने की काफी गुंजाइश है। विधानसभा चुनावों में किसान कर्ज माफी की घोषणा से इसे लेकर उम्मीद बढ़ी है।

बजट में कंस्ट्रक्शन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और हाउसिंग क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। मौजूदा सरकार के पिछले कुछ साल के बजट में यही रुख देखने को मिला है। पेयजल और स्वच्छता के साथ ग्रामीण परियोजनाओं पर फोकस होगा। कृषि क्षेत्र की हालत सुधारने पर भी ध्यान होगा। उर्वरक उद्योग के लिए कुछ अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जो मुख्यत: सरकार की नीतियों पर आधारित हैं और सब्सिडी व अनुकूल माहौल पर निर्भर करते हैं।

बजट के बाद निवेशक अपने पोर्टफोलियो को फिर संतुलित करेंगे। इससे कुछ मुनाफा-वसूली दिख सकती है। कुछ क्षेत्रों को लेकर उनका फोकस बदलेगा। संबंधित शेयरों में तेजी संभव है। निफ्टी-50 इंडेक्स की ज्यादातर कंपनियों की आय दो अंक में रहने का अनुमान है। लेकिन इनका मार्जिन घटने की आशंका है। कम आय और मार्जिन पर दबाव बढ़ने से स्मॉल और मिडकैप शेयरों का प्रदर्शन कमजोर है। ऐसे में अच्छी रेवेन्यू ग्रोथ के साथ ब्लूचिप कंपनियों के शेयरों की अगुआई में रैली दिखने की उम्मीद है। इस तरह 2019 में निवेश के लिए से शेयर विशेष पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गिरावट के समय निवेश की रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा।

बजट के बाद बाजार में अस्थिरता बढ़ने के आसार हैं। काफी कुछ वैश्विक कारकों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर निर्भर करेगा। फेड रेट में इजाफा आउटलुक को कमजोर कर सकता है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से देश के शेयर बाजारों के सकारात्मक माहौल को मदद मिलती रहेगी।यूपीएल लिमिटेड, टीटागढ़ वैगन, एनसीसी, एनबीसीसी, दिलीप बिल्डकॉन कुछ ऐसे शेयर हैं जिनमें बजट के बाद कुछ तेजी संभव है। पिछले पांच साल में करदाताओं की संख्या 40% बढ़ी है। टैक्स-टू-जीडीपी रेशियो इन वर्षों के दौरान 56% बढ़ा है। व्यक्तिगत आयकरदाता करीब 41% बढ़े हैं। यदि सरकार आयकर के टैक्स स्लैब में बदलाव करती है तो बाजार में रैली संभव है। ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट जैसे खपत वाले सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। और अंत में, अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने हैं। नई सरकार बनने के बाद बाजार मे लंबी अवधि के लिहाज से निवेश का प्रवाह बढ़ेगा। इसमें निवेशकों को पैसा बनाने में मदद मिलेगी।

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