लोकसभा चुनाव 2019: प्रशांत किशोर की उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात- क्या है इसका मतलब

चुनावी रणनीतिकार और जनता दल (यूनाइटेड) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने मुंबई में शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे से मुलाक़ात की है.

इस मुलाक़ात के बाद अपने ट्वीट में प्रशांत किशोर ने कहा है- एनडीए के हिस्सा के तौर पर हम आपके साथ मिलकर महाराष्ट्र में आगामी लोकसभा चुनाव में और उसके बाद भी जीत सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे.

महाराष्ट्र में बीजेपी और शिव सेना के तल्ख़ रिश्तों के बीच प्रशांत किशोर का शिव सेना नेतृत्व से मिलना चर्चा का विषय बन सकता है.

राजनीतिक हलकों में ऐसी चर्चा है कि एनडीए के घटक दल अपने को प्रभावकारी दबाव समूह के रूप में आगे करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.

जानकारों की मानें तो जनता दल (यू) के प्रशांत किशोर की ये मुलाक़ात उसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है.

बीजेपी प्रमुख अमित शाह ने कहा है कि 2019 के चुनावी नतीजे आने के बाद चंद्रबाबू नायडू के लिए एनडीए का दरवाज़ा बंद हो जाएगा.

आंध्र प्रदेश के विज़िअनागरम में बूथ कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने ये बात कही है. शाह ने चंद्रबाबू नायडू को यूटर्न सीएम करार दिया. बीजेपी प्रमुख आख़िर ऐसा क्यों कह रहे हैं? अगर 2019 में बीजेपी को सरकार बनाने में सांसदों की कमी होगी तो क्या वो चंद्रबाबू नायडू से समर्थन लेने में परहेज करेगी? शायद ही ऐसा हो.

अमित शाह ऐसा इसलिए कह रहे हैं ताकि आंध्र प्रदेश के लोगों को लगे कि बीजेपी अपनी जड़ें जमाने के लिए किसी के कंधे का सहारा नहीं लेना चाहती है और अपने दम पर कुछ करने के लिए गंभीर है.

दो फ़रवरी, 2019
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी प्रमुख अमित शाह ने शनिवार को मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी को अयोध्या में राम मंदिर पर अपना रुख़ स्पष्ट करने की चुनौती दी.

इसके साथ ही शाह ने ये भी कहा कि बीजेपी 2014 के आम चुनाव से ज़्यादा सीटों पर जीत दर्ज करेगी.

शाह ने उत्तर प्रदेश में अमरोहा ज़िले के गजरौला में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ''हम अयोध्या में जल्द भव्य राम मंदिर बनाना चाहते हैं. हम अयोध्या में राम मंदिर बनाएंगे. जब यह मामला कोर्ट में गया तो कांग्रेस ने इसे लटकाने की कोशिश की. मैं चाहता हूं कि विपक्षी पार्टियां और राहुल गांधी आम चुनाव से पहले बताएं कि अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए या नहीं.''

राम मंदिर का मुद्दा 90 के दशक से ही भारत की चुनावी राजनीति के केंद्र में रहा है. राम मंदिर को भारतीय राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण करने की क्षमता रखने वाले मुद्दे के तौर पर देखा जाता है.

बीजेपी अक्सर कहती थी कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में उसकी सरकार होने पर राम मंदिर का निर्माण आसान हो जाएगा. बीजेपी दोनों जगह सत्ता में है और राम मंदिर पर सवाल पूछे जा रहे हैं.

अब बीजेपी ने यही सवाल राहुल गांधी पर दाग दिया है. ज़ाहिर है बीजेपी इस मामले में ख़ुद को फंसते हुए नहीं देखना चाहती है. ऐसे में बीजेपी को लगता है कि ये सवाल विपक्ष के पाले में डालना ज़्यादा ठीक होगा.

शुक्रवार को मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले अपना आख़िरी बजट पेश किया. इसमें 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' योजना के बारे में ऐलान किया गया जिसके तहत दो हेक्टर तक भूमि वाले किसानों को उनके खाते में सालाना छह हज़ार रूपये सरकार देगी.

एक तरफ़ जहां कांग्रेस के कुछ नेता और कई जानकार इसे किसानों को मनाने की कोशिश क़रार दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ़ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा है कि बजट में सरकार ने किसानों का अपमान किया है.

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे चुनावी मेनिफेस्टो क़रार दिया है और कहा कि भाजपा वोटरों को रिझाने की कोशिश कर रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार ने बजट में किसानों के लिए जो सीधे धन की बात की है वो कम है.

शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा, "अगर सरकार 15 लोगों का साढ़े तीन लाख करोड़ रूपये माफ़ कर सकती है और किसानों को दिन के 17 रूपये देती है. ये अपमान नहीं है तो क्या है."

प्रोफेसर अरुण कुमार ने बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय को बताया, "जीतने के लिए इन्होंने ये सारी घोषणाएं कर दी हैं."

वो कहते हैं, "किसान को इससे बहुत अधिक मदद तो नहीं मिलेगी लेकिन हां, कुछ राहत ज़रूर मिलेगी. उम्मीद थी कि 4-5 हज़ार रूपये प्रतिमाह या फिर 18 हज़ार रूपये साल में मिलेंगे. वैसा तो कुछ नहीं है. ऐसा लगता है कि जिनके पास ज़मीन है उन्हें लाभ मिलेगा लेकिन जिनके पास ज़मीन नहीं हैं उन्हें कैसे शामिल किया जाएगा से अभी साफ नहीं है."

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार मिहिर स्वरूप शर्मा ने एनडीटीवी की वेबसाइट पर लिखे अपने लेख में इसे 'अंतरिम बजट नहीं बल्कि प्रधानमंत्री बचाओ योजना' कहा है.

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