छत्तीसगढ़ का किंग कौन? हर तीसरी सीट पर कांटे की टक्कर
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के 72 सीटों पर वोटिंग जारी है. बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे का मुकाबला है. वहीं, अजीत जोगी ने बसपा के साथ गठबंधन करके मुकाबले को त्रिकोणीय और दिलचस्प बना दिया है. लेकिन राज्य की 31 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पिछले चुनाव में जीत-हार का अंतर एक फीसदी से लेकर 5 फीसदी के बीच था. ऐसे में राज्य की हर तीसरी सीट पर कांटे की टक्कर इस बार है.
बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला था. मामूली वोटों के 0.75 अंतर से बीजेपी सत्ता हासिल किया था. तखतपुर और मोहला-मानपुर विधानसभा सीटें ऐसी थी जहां जीत-हार का अंतर एक फीसदी से भी कम था. तखतपुर को कांग्रेस ने जीती था. वहीं, मोहला-मानपुर सीट बीजेपी के हिस्से में गई थी.
प्रदेश की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर 5 फीसदी से कम रहा था. इनमें से 20 सीटें बीजेपी, 9 कांग्रेस 1 बसपा और 1 अन्य के खाते में गई थी. जबकि 9 सीटों पर अंतर 20 फीसदी से ज्यादा रहा. इनमें से 7 बीजेपी ने जीती और 2 कांग्रेस के खाते में गईं.
प्रदेश की कम वोटों से जीत-हार वाली सीटें- लुंड्रा, पत्थलगांव, रामपुर, सिपत, मालखरोदा, अभनपुर, बलौदाबाजार, मोहला-मानपुर, कोटा, अकलतरा, चौकी, भाटापारा, महासमुंद, भानुप्रतापपुर और खुज्जी थी.
बता दें कि प्रदेश की 6 सीटों पर हार-जीत का अंतर पांच से 10 हजार के बीच था. इनमें चार सीट बीजेपी और दो कांग्रेस के पास हैं. वहीं, 4 सीटों पर हार-जीत का अंतर 10 से 15 हजार के बीच था. इनमें तीन बीजेपी और एक कांग्रेस के पास है. जबकि 5 सीटों पर हार-जीत का अंतर 20 हजार से अधिक का था. ये सीटें बीजेपी के पास है.
अमृतसर ग्रेनेड हमले के पीछे कौन है, यह बात अभी पूरी तरह साफ नहीं है. लेकिन जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक की तफ्तीश से इस बात के संकेत मिलते हैं कि इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है.
सूत्रों के मुताबिक खालिस्तानी आतंकियों और ISI ने मिलकर भारत के सैन्य ठिकानों और सैन्य बलों पर हमले की साजिश रची और उन्हें अंजाम भी दिया. दरअसल, आईएसआई अपने नापाक मकसद को पूरा करने के लिए खालिस्तान समर्थक युवकों को भर्ती कर रहा है.
हैरानी की बात है कि पंजाब में पिछले 3 महीनों में कश्मीरी, खालिस्तानी और पाकिस्तानी आतंकियों ने पाक एजेंसी ISI के साथ मिलकर भारत के पंजाब सूबे को दहलाने की कोशिशें की हैं. इन सारी घटनाओं से पर्दा उठ चुका है. इन सभी हमलों और वारदातों के पीछे सिर्फ और सिर्फ आईएसआई की सूरत नजर आती है.
आपको बताते हैं खालिस्तानी आतंकियों और पाकिस्तानी एजेंसी से जुड़ी उन वारदातों के बारे में जो पिछले तीन माह इस आतंकी गिरोह ने अंजाम दी हैं-
बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला था. मामूली वोटों के 0.75 अंतर से बीजेपी सत्ता हासिल किया था. तखतपुर और मोहला-मानपुर विधानसभा सीटें ऐसी थी जहां जीत-हार का अंतर एक फीसदी से भी कम था. तखतपुर को कांग्रेस ने जीती था. वहीं, मोहला-मानपुर सीट बीजेपी के हिस्से में गई थी.
प्रदेश की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर 5 फीसदी से कम रहा था. इनमें से 20 सीटें बीजेपी, 9 कांग्रेस 1 बसपा और 1 अन्य के खाते में गई थी. जबकि 9 सीटों पर अंतर 20 फीसदी से ज्यादा रहा. इनमें से 7 बीजेपी ने जीती और 2 कांग्रेस के खाते में गईं.
प्रदेश की कम वोटों से जीत-हार वाली सीटें- लुंड्रा, पत्थलगांव, रामपुर, सिपत, मालखरोदा, अभनपुर, बलौदाबाजार, मोहला-मानपुर, कोटा, अकलतरा, चौकी, भाटापारा, महासमुंद, भानुप्रतापपुर और खुज्जी थी.
बता दें कि प्रदेश की 6 सीटों पर हार-जीत का अंतर पांच से 10 हजार के बीच था. इनमें चार सीट बीजेपी और दो कांग्रेस के पास हैं. वहीं, 4 सीटों पर हार-जीत का अंतर 10 से 15 हजार के बीच था. इनमें तीन बीजेपी और एक कांग्रेस के पास है. जबकि 5 सीटों पर हार-जीत का अंतर 20 हजार से अधिक का था. ये सीटें बीजेपी के पास है.
अमृतसर ग्रेनेड हमले के पीछे कौन है, यह बात अभी पूरी तरह साफ नहीं है. लेकिन जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब तक की तफ्तीश से इस बात के संकेत मिलते हैं कि इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ है.
सूत्रों के मुताबिक खालिस्तानी आतंकियों और ISI ने मिलकर भारत के सैन्य ठिकानों और सैन्य बलों पर हमले की साजिश रची और उन्हें अंजाम भी दिया. दरअसल, आईएसआई अपने नापाक मकसद को पूरा करने के लिए खालिस्तान समर्थक युवकों को भर्ती कर रहा है.
हैरानी की बात है कि पंजाब में पिछले 3 महीनों में कश्मीरी, खालिस्तानी और पाकिस्तानी आतंकियों ने पाक एजेंसी ISI के साथ मिलकर भारत के पंजाब सूबे को दहलाने की कोशिशें की हैं. इन सारी घटनाओं से पर्दा उठ चुका है. इन सभी हमलों और वारदातों के पीछे सिर्फ और सिर्फ आईएसआई की सूरत नजर आती है.
आपको बताते हैं खालिस्तानी आतंकियों और पाकिस्तानी एजेंसी से जुड़ी उन वारदातों के बारे में जो पिछले तीन माह इस आतंकी गिरोह ने अंजाम दी हैं-
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